
तिल्दा-नेवरा। दिलदयाल चौक से गुरु घासीदास चौक तक फैली लाल धूल की समस्या अब केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे प्रशासन के केंद्र – तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय और तिल्दा कोर्ट परिसर तक पहुंच चुकी है। राइस मिलों की भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से उठने वाली लाल धूल ने सरकारी दफ्तरों के बाहर भी माहौल धुंधला कर दिया है।
प्रशासनिक क्षेत्र होने के बावजूद यहां सफाई और धूल नियंत्रण की व्यवस्था न के बराबर है, जिससे कामकाज के लिए आने वाले लोगों सहित कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी दफ्तरों के बाहर ‘लाल धुंध’ — न्याय व प्रशासन के केंद्र आज धूल से ढंके
तहसील, एसडीएम और कोर्ट जैसी महत्वपूर्ण जगहें आमतौर पर साफ-सुथरी और व्यवस्थित रहती हैं। लेकिन तिल्दा-नेवरा में स्थिति उलट है।
रोजाना बड़ी संख्या में लोग इन दफ्तरों में अपने कामों के लिए पहुंचते हैं, परन्तु लाल धूल के कारण—
• चलना मुश्किल
• आंखों में जलन
• कपड़े धूल से लाल
• दस्तावेज़ भी गंदे हो जाते हैं
• बुजुर्गों और महिलाओं को सांस लेने में दिक्कत
जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
राइस मिलों की गाड़ियाँ ‘धूल का बवंडर’ बनाकर गुजरती हैं
स्थानीय लोगों और दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि—
• राइस मिलों के ट्रक बिना ढके हुए धान-भूसी लेकर निकलते हैं
• वाहनों से उड़ने वाली लाल धूल सीधे जिला स्तरीय सरकारी कार्यालयों के परिसर में पहुंचती है
• ओवरलोड ट्रकों से सड़क की स्थिति और बिगड़ती है, जिससे धूल का स्तर दोगुना बढ़ जाता है
• राइस मिल संचालक न सड़क के बाहर सफाई करते हैं, न पानी का छिड़काव
लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी कार्यालयों तक धूल पहुंच रही है तो आम बस्तियों और दुकानों की क्या हालत होगी?
न्याय व्यवस्था भी प्रभावित — कोर्ट आने वाले वकील और पक्षकार परेशान
कोर्ट परिसर के बाहर धूल इतनी अधिक उड़ती है कि कई बार लोग फाइलें और दस्तावेज़ बचाते हुए दिखाई देते हैं।
वकीलों ने बताया कि—
• सुबह से शाम तक कोर्ट चौराहा धूल से ढका रहता है
• सफेद कपड़े पहनने वाले अधिवक्ता सबसे ज्यादा परेशान
• पक्षकार और गवाह भी स्वास्थ्य समस्या की शिकायत करते हैं
नागरिकों का तीखा आरोप — प्रशासन अपनी ही आँखों के सामने समस्या देख रहा, फिर भी चुप
क्षेत्रवासियों का कहना है कि तहसील और कोर्ट के आसपास धूल का होना यह साबित करता है कि—
• राइस मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है
• प्रशासनिक अधिकारी अपनी नाक के नीचे गंभीर समस्या देखकर भी कार्रवाई नहीं कर रहे
• शहर की साख और छवि दोनों बिगड़ रही है
लोगों ने यह भी कहा कि अगर सरकारी दफ्तरों के बाहर यही स्थिति है तो आवासीय इलाकों में धूल का स्तर कितनी गंभीर स्थिति में होगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।
जनता की मांग — राइस मिलों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि—
• राइस मिल संचालकों को धूल नियंत्रण उपाय अनिवार्य किए जाएं
• सभी ट्रकों को ढककर चलाने का सख्त नियम लागू किया जाए
• सड़क पर दैनिक पानी का छिड़काव और सफाई सुनिश्चित की जाए
• तहसील, कोर्ट और एसडीएम कार्यालय मार्ग को धूलमुक्त जोन घोषित किया जाए
• जरूरत पड़ने पर भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया जाए
अब जनता का एक ही सवाल — “जिस सड़क से प्रशासन चलता है, वही साफ नहीं… तो शहर कैसे साफ होगा?”
तिल्दा-नेवरा में राइस मिलों की वजह से फैली यह धूल समस्या प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
अब देखना यह है कि अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर कब तक चुप रहते हैं और कब ठोस कदम उठाते हैं।

