
संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत स्वच्छ जल–स्वच्छ मन अभियान का चौथा चरण 22 फरवरी 2026 को प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक भारतभर में एक साथ आयोजित किया जा रहा है। तिल्दा ब्रांच के मुखी श्री सुंदरदास जैसवानी ने बताया कि तिल्दा नेवरा में यह सेवा गतिविधि वार्ड क्रमांक 2, जुनापेठू तालाब, सासाहोली में आयोजित होगी, जिसमें मिशन के लगभग 100 अनुयायी सक्रिय रूप से श्रमदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि जब सेवा साधना का रूप ले ले और प्रकृति के प्रति संवेदना जीवन का मूल बन जाए, तभी ऐसे पावन संकल्प जन्म लेते हैं। मानव सेवा एवं लोक कल्याण की इसी चेतना को जीवंत रूप देने हेतु यह राष्ट्रीय अभियान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशन में भव्य रूप से संपन्न कराया जा रहा है।
संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी दी कि देशभर में 1500 से अधिक स्थानों पर एक ही समय में यह अभियान आयोजित होगा। उनके अनुसार, इस व्यापक भागीदारी के कारण यह जनअभियान ऐतिहासिक स्वरूप धारण करेगा और जल संरक्षण तथा स्वच्छता का संदेश समाज के हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुँचेगा।
उन्होंने बताया कि जल केवल संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार और ईश्वर की अमूल्य देन है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणाओं से 2003 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रारंभ किए गए ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का उद्देश्य जल संरक्षण को केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित न रखकर उसे जीवनशैली और संस्कार के रूप में स्थापित करना है।
नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं और झरनों जैसे जलस्रोतों के संरक्षण हेतु समर्पित इस अभियान के पिछले तीन चरणों ने सेवा, समर्पण और सहभागिता की मिसाल प्रस्तुत की है। इसी प्रेरणा से चौथा चरण और अधिक संगठित, प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान गीत, जागरूकता अभियान, सामूहिक गायन और सोशल मीडिया गतिविधियों के माध्यम से जलजनित रोगों तथा स्वच्छता के महत्त्व पर जनजागरूकता बढ़ाई जाएगी। मिशन का संदेश है कि “जब मन निर्मल होगा तो प्रकृति भी स्वच्छ होगी, और जब सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, तब समाज का नव निर्माण होता है।”
सतगुरु माता जी का संदेश भी यही है कि धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजोकर रखना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है। ‘स्वच्छ जल–स्वच्छ मन’ अभियान इसी पावन संकल्प का सजीव प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए सौहार्दपूर्ण भविष्य के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करता है।
