
तिल्दा-नेवरा। तिल्दा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र इन दिनों अवैध प्लाटिंग के अड्डे में बदल गए हैं। तुलसी, नेवरा, कोका, गुलगुल, कोटा, बैसर और खपरीकला में भूमाफिया खुलेआम खेती की जमीनों को काटकर प्लाट में तब्दील कर रहे हैं। न कोई सरकारी अनुमति, न राजस्व विभाग की स्वीकृति, फिर भी प्लाटिंग का काम इतनी निर्भीकता से हो रहा है मानो पूरे क्षेत्र में कानून नाम की कोई चीज़ ही न हो।
नियमों की धज्जियां — प्रशासन की चुप्पी
- डाइवर्जन,
- नक्शा,
- अवैध प्लाटिंग पर रोक,
- भू-उपयोग अनुमति,
- और न ही राजस्व नियमों का पालन किया जा रहा है।
इसके बावजूद प्लाटिंग का धंधा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि “यह खेल प्रशासन की जानकारी के बिना संभव ही नहीं है।” कुछ अधिकारियों की मिलीभगत, अनदेखी और मौन सहमति ने भूमाफियाओं को इतना बेखौफ बना दिया है कि वे किसानों की जमीनों को रात–दिन काटकर बेचने में लगे हैं।
भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद कि…
- कई गांवों में खेतों में सीधे खेत-पथ पर मिट्टी डालकर अस्थायी सड़कें बनाई जा रही हैं।
- प्लॉटों का विज्ञापन तक खुलेआम सोशल मीडिया में जारी है।
- बिना किसी इंफ्रास्ट्रक्चर—नाली, सड़क, पानी, बिजली—के प्लाटों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि “अगर कोई विरोध करता है तो उसे दबाव में लाने की कोशिश की जाती है।”
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा — शिकायत की तैयारी
तुलसी से लेकर खपरीकला तक कई किसानों ने बताया कि इस अवैध प्लाटिंग से गांव का संतुलन बिगड़ रहा है। जगह-जगह असंगठित बस्तियां बस रही हैं और भविष्य में यह क्षेत्र अव्यवस्था, अतिक्रमण और आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बन सकता है।
ग्रामीण अब इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि वे
- तहसीलदार,
- एसडीएम,
- कलेक्टर,
- आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री तक
पूरा मामला लेकर जाएंगे।
“सरकार बदली, सिस्टम नहीं” — लोगों का सीधा आरोप
स्थानीय लोगों ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकारें बदल जाती हैं, पर अवैध प्लाटिंग करने वालों का नेटवर्क और सिस्टम का संरक्षण जस का तस बना रहता है।”
उनका कहना है कि जब तक प्रशासन कठोर कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक भूमाफिया ग्रामीण संरचना को तहस-नहस करते रहेंगे।
