तिल्दा में अवैध कारोबार बेलगाम, जनता पूछ रही—कार्रवाई होगी या सिर्फ खानापूर्ति?

तिल्दा-नेवरा। निखिल वाधवा।

तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में अवैध कारोबारों का जाल दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शहर और आसपास के इलाकों में अवैध गैस रिफिलिंग, डुप्लीकेट गुटखा, नकली कॉस्मेटिक सामान, अवैध मुरुम उत्खनन और मिलावटी दैनिक उपयोग के उत्पादों का कारोबार खुलेआम चर्चा में है। इसके बावजूद जमीन पर ठोस और लगातार कार्रवाई कम ही दिखाई देती है, जिससे आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रवि सब्जी मार्केट के पास अवैध गैस रिफिलिंग का खेल लंबे समय से चल रहा है। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान को जोखिम में डालने वाला मामला है। गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन शिकायतों के बावजूद इस पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही।

इसी तरह बाजार में डुप्लीकेट गुटखा और नकली ब्रांडेड कॉस्मेटिक सामान की बिक्री भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। पहले युवाओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाला नकली गुटखा सामने आया, और अब चेहरे पर लगाने वाले पोंड्स पाउडर जैसे प्रोडक्ट्स तक डुप्लीकेट ब्रांड के नाम पर बिकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य, त्वचा और विश्वास पर हमला है।

दूसरी ओर तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में अवैध मुरुम उत्खनन भी बदस्तूर जारी रहने की चर्चाएं हैं। भारी वाहनों से हो रहे इस उत्खनन से सड़कों की हालत खराब हो रही है और पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ रहा है। इसके बावजूद कार्रवाई की खबरें कभी-कभार ही सामने आती हैं।

जनता के बीच उठ रहे तीखे सवाल
अब शहर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इतने अवैध कारोबार खुलेआम चर्चा में हैं, तो क्या कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर छापेमारी और छोटी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही कारोबार फिर शुरू हो जाता है। इससे लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि सिर्फ खानापूर्ति से काम चलाया जा रहा है, जबकि नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार नहीं हो रहा।

जवाबदेही तय करने की मांग
जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, पुलिस, खाद्य एवं औषधि विभाग, नगर पालिका और खनिज विभाग मिलकर संयुक्त विशेष अभियान चलाएं, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करें और अवैध कारोबारियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई करें।
लोगों का कहना है कि जब तक दुकान सील, भारी जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और आपराधिक प्रकरण जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक तिल्दा क्षेत्र में यह अवैध कारोबार थमने वाला नहीं है।

संवाददाता सवाल:
क्या तिल्दा की जनता को अब भी सिर्फ छिटपुट कार्रवाई और आश्वासन ही मिलते रहेंगे, या फिर अवैध कारोबार के इस पूरे नेटवर्क पर सच में कोई बड़ा प्रहार होगा?

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