
तिल्दा-नेवरा नगर पालिका द्वारा बुधवार को की गई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद शहर में व्यापक विरोध देखने को मिला। दुकानों के बाहर लगे शेड (छज्जों) को जेसीबी के माध्यम से हटाए जाने पर नाराज व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने मुख्य मार्ग पर उतरकर चक्का जाम कर दिया, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था घंटों तक पूरी तरह बाधित रही।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अचानक कार्रवाई करते हुए उनके शेड तोड़ दिए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से स्थापित दुकानों के सामने लगे शेड को इस तरह हटाना उनके व्यवसाय पर सीधा प्रभाव डालता है।
घटना के बाद बड़ी संख्या में व्यापारी और नागरिक एकत्रित होकर सड़क पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। चक्का जाम के चलते मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आमजन, स्कूली बच्चे और दफ्तर जाने वाले लोग घंटों परेशान होते रहे।
इस दौरान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोतीलाल हिंदुजा भी मौके पर पहुंचे और व्यापारियों के समर्थन में खड़े नजर आए। उनके शामिल होने से प्रदर्शन को और बल मिला और लोगों ने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि अतिक्रमण हटाने से पहले नगर पालिका प्रशासन स्पष्ट रूप से नोटिस जारी करे और प्रभावित व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि बिना पुनर्वास की योजना के इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर मामला शांत कराने का प्रयास किया गया।
वहीं, नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि शहर में बढ़ते अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही थी। इसी के तहत मुख्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है, ताकि आवागमन सुगम हो सके।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोतीलाल हिंदुजा ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पूरी तरह मनमानी, दादागिरी और तानाशाहीपूर्ण है। उनके अनुसार, नियम के तहत व्यापारियों को पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था और उन्हें समय दिया जाना चाहिए था, लेकिन बिना सूचना के बलपूर्वक शेड हटाकर व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा।
फिलहाल, अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई को लेकर शहर में असंतोष का माहौल बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और व्यापारियों के बीच इस विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
