
तिल्दा-नेवरा।नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 3 में नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार पुराने नाली को जेसीबी से तोड़कर हटाने तथा उसके स्थान पर करीब 450 मीटर नई नाली का निर्माण किया जाना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार मौके पर पुरानी नाली को जेसीबी से सही तरीके से तोड़ा ही नहीं गया और न ही निर्धारित लंबाई में नई नाली का निर्माण किया गया। बताया जा रहा है कि करीब 100 मीटर के आसपास ही निर्माण कार्य हुआ है, जबकि रिकॉर्ड में इससे कहीं अधिक कार्य दिखाया गया है।
सूत्रों का दावा है कि इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत से लगभग 650 मीटर नाली निर्माण का भुगतान निकाल लिया गया, जबकि वास्तविक कार्य बहुत कम मात्रा में हुआ है। इस पूरे मामले में 37 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाले जाने की भी चर्चा है, जिससे नगर पालिका के कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में नगर पालिका के इंजीनियर पुष्कर चंद्राकर का नाम भी चर्चा में सामने आ रहा है। बताया जाता है कि उनकी नगर पालिका में काफी पकड़ मानी जाती है। सूत्रों के अनुसार पूर्व में उनका स्थानांतरण भी हुआ था, जिस पर उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे लिया था, हालांकि बाद में स्टे खारिज होने के बाद उनका ट्रांसफर बलौदा (जिला बिलासपुर) कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तिल्दा नेवरा नगर पालिका का पद नहीं छोड़ा।
वहीं जब इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि “मुझे इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है, आप सामने आकर चर्चा करें।”
इधर वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद गोविंद लालवानी ने भी कहा कि “मुझे इस नाली निर्माण के बारे में जानकारी नहीं है। यदि इस तरह की शिकायत सामने आई है तो मैं नगर पालिका जाकर इसकी जानकारी लूंगा। अगर कार्य कम हुआ है और भुगतान अधिक हुआ है तो यह गंभीर मामला है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो नाली निर्माण कार्य में हुई गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
