किसके संरक्षण में चल रहा कोयला खेल? शहर की सड़कों पर दिन-रात दौड़ रहीं ओवरलोड गाड़ियां

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तिल्दा-नेवरा।
शहर के मुख्य मार्गों से इन दिनों ओवरलोड कोयले से भरी छोटी-बड़ी गाड़ियों का बेखौफ संचालन लगातार जारी है। सबसे गंभीर बात यह है कि न तो वाहनों को तिरपाल से ढका जा रहा है और न ही सड़क पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों, राहगीरों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार सासाहोली के बंद रेलवे फाटक के पास स्थित रैक पॉइंट पर कोयले की रैक लगने के बाद रविवार सुबह से ही कोयले से भरे वाहन मुख्य मार्गों से गुजरते रहे। इन वाहनों में क्षमता से अधिक कोयला भरा गया, ऊपर से बिना ढके खुले रूप में शहर के बीच से निकाला गया। इससे सड़क पर जगह-जगह कोयला गिरता रहा और पूरा मार्ग धूल व काले गुबार से पट गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रैक पॉइंट संचालन के लिए स्पष्ट नियम बने हुए हैं, जिनमें सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव, वाहनों को तिरपाल से ढंकना और ओवरलोडिंग पर रोक शामिल है। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

तिल्दा से खरोरा मार्ग और तिल्दा से सिमगा मार्ग पर दिन-रात दौड़ रहे कोयला वाहन न केवल सड़क की हालत बिगाड़ रहे हैं, बल्कि राहगीरों के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर डाल रहे हैं। उड़ती धूल और कोयले के कणों से दोपहिया वाहन चालकों, दुकानदारों और आसपास के रहवासियों को सांस लेने तक में परेशानी हो रही है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण शहर में यह चर्चा भी तेज है कि यह अवैध कारोबार किसी प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण में संचालित हो रहा है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि “जब बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही, तो आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है?”

कुछ नागरिकों ने एक मंत्री के संरक्षण में अवैध कोयला कारोबार चलने की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार हो रही अनदेखी ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

आम नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड और बिना ढकी कोयला गाड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके।

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