
31 दुकानों के निर्माण पर सवाल, ग्रामीण बोले— पहले सड़क और मूलभूत सुविधाओं का हो विकास, फिर विकास की बातें
तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) इन दिनों विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पंचायत द्वारा 31 दुकानों के निर्माण को विकास की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर गांव के कई ग्रामीणों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। उनका कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, जबकि गांव की सड़कें, गलियां और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं बदहाल स्थिति में हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वार्ड क्रमांक 1, 5, 9 एवं 14 की सड़कें बारिश के कारण कीचड़ से लबालब हैं। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं, जिससे दोपहिया वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं प्रतिदिन परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क सुधार की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है।
रात होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं कई वार्ड
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कई वार्डों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। कई बिजली के खंभों पर लगी लाइटें बंद हैं, जबकि कुछ स्थानों पर लाइटें ही नहीं लगी हैं। शाम ढलते ही गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं और असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
31 दुकानों के निर्माण पर उठ रहे सवाल
पंचायत द्वारा 31 दुकानों के निर्माण को विकास का प्रतीक बताया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव की मूलभूत सुविधाएं ही बदहाल हैं तो सबसे पहले उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं हर ग्रामीण का अधिकार हैं और इन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
एक ग्रामीण ने कहा, “दुकानों का निर्माण बाद में भी हो सकता है, लेकिन पहले गांव की सड़कें और गलियां तो चलने लायक बनाई जाएं।”
“यह पंचायत का विकास है या किसी और का?”
कुछ ग्रामीणों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि पंचायत में गांव के समग्र विकास की अपेक्षा अन्य कार्यों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि गांव की बुनियादी समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास का वास्तविक पैमाना गांव की सड़कें, स्वच्छ नालियां, रोशनी और मूलभूत सुविधाएं हैं, न कि केवल नए निर्माण कार्यों का प्रचार।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- वार्ड क्रमांक 1, 5, 9 एवं 14 की जर्जर सड़कों का तत्काल निर्माण।
- खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत एवं नई लाइटों की स्थापना।
- जल निकासी और नालियों की समुचित व्यवस्था।
- पंचायत के विकास कार्यों में पारदर्शिता तथा मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता।
अब ग्रामीणों की निगाहें संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। उनका कहना है कि यदि पंचायत वास्तव में विकास का मॉडल बनना चाहती है, तो सबसे पहले गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान करना होगा। जब गलियां कीचड़ में हों, सड़कें जर्जर हों और वार्ड अंधेरे में डूबे हों, तब विकास के दावे लोगों के मन में कई सवाल खड़े करते हैं।
