छतौद में प्रस्तावित स्टील प्लांट के खिलाफ ग्रामीण लामबंद, सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे सवाल

छतौद में प्रस्तावित स्टील प्लांट के खिलाफ ग्रामीण लामबंद, सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे सवाल

तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत छतौद में प्रस्तावित स्टील प्लांट को लेकर ग्रामीणों में विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। करीब 10-12 दिन पहले आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों और कई पंचों द्वारा प्रस्तावित प्लांट के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं दिए जाने का विरोध किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अब पंचायत स्तर पर एनओसी जारी करने की कथित तैयारी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।

सूत्रों के अनुसार ग्राम सभा में प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों ने खुलकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उपसरपंच से चर्चा में भी यह बात सामने आई कि ग्राम सभा में एनओसी नहीं देने की बात कही गई थी। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब ग्राम सभा में विरोध दर्ज किया गया था तो उसके बाद एनओसी देने की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है?

सरपंच-सचिव पर मिलीभगत के आरोप

मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सूत्रों का दावा है कि दोनों की कथित मिलीभगत से प्लांट के पक्ष में एनओसी तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, ग्राम सभा के रजिस्टर में बाद में गोपनीय तरीके से लिखापढ़ी किए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राम सभा का निर्णय एनओसी नहीं देने के पक्ष में था, तो उसके बाद रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की बदलाव की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया और ग्राम सभा के अधिकारों पर सवाल खड़ा करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम सभा की मूल कार्यवाही, प्रस्ताव और रजिस्टर की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

‘प्लांट नहीं, गांव का पर्यावरण बचाना है’

ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक प्लांट खुलने से रोजगार और विकास के दावे किए जा सकते हैं, लेकिन यदि इसके कारण गांव की हवा, पानी, खेती और पर्यावरण प्रभावित होता है तो ऐसा विकास ग्रामीणों को मंजूर नहीं है। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि प्लांट खुलने से विकास के बजाय आने वाले समय में पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जनहित और पर्यावरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में ग्राम पंचायत को पारदर्शिता के साथ निर्णय लेना चाहिए, न कि कथित रूप से गुप्त तरीके से एनओसी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।

देवरी में भी जनसुनवाई के दौरान विरोध की चर्चा

बताया जा रहा है कि इसी प्रस्तावित संयंत्र को लेकर देवरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जहां भी स्थानीय लोगों द्वारा प्लांट का विरोध किए जाने की बात सामने आई थी। अब छतौद में एनओसी को लेकर उठे विवाद ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

आने वाले समय में प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को देखते हुए ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई और ग्राम सभा की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से दर्ज किया जाना चाहिए।

रिकॉर्ड की जांच और एनओसी रोकने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सभा के मूल रजिस्टर और कार्यवाही की जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की एनओसी जारी न की जाए। साथ ही यदि रजिस्टर में छेड़छाड़ या ग्राम सभा के निर्णय में बदलाव किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल छतौद में प्रस्तावित स्टील प्लांट का विरोध और सरपंच-सचिव की कथित भूमिका को लेकर उठे सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के भविष्य और पर्यावरण से जुड़े इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय पूरी पारदर्शिता और ग्राम सभा की वास्तविक सहमति के आधार पर ही होना चाहिए।

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