अल्दा आंदोलन के बीच पुलिस की सख्ती, ग्रामीणों की अराजकता पर दो मामले दर्ज; दोबारा उपद्रव पर होगी कड़ी कार्रवाई

तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत अल्दा में जारी आंदोलन के बीच तिल्दा पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी ने एक बार फिर बड़ी अनहोनी को टाल दिया। सोमवार को ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार की कार को निशाना बनाकर क्षतिग्रस्त करने और प्रशासनिक कार्य में बाधा डालने की घटना के बाद पुलिस ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए ग्रामीणों के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

मौके पर तैनात महिला और पुरुष पुलिस बल ने पूरे घटनाक्रम में जिस सतर्कता और संयम का परिचय दिया, उसकी शहरभर में सराहना हो रही है। उग्र भीड़ द्वारा पत्रकार की सफेद कार को घेरने और तोड़फोड़ की कोशिश के दौरान पुलिस जवान तुरंत बीच में पहुंचे और सुरक्षा घेरा बनाकर स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस की यही तत्परता संभावित आगजनी और बड़ी दुर्घटना को रोकने में निर्णायक साबित हुई।

पुलिस ने संभाला पूरा मोर्चा

धरना-प्रदर्शन के दौरान एसडीएम कार्यालय और तहसील परिसर के बाहर भीड़ लगातार बढ़ती रही, लेकिन पुलिस बल ने हर मोर्चे पर मजबूती से डटे रहकर हालात संभाले। प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले आम लोगों को राहत दिलाने और आवाजाही बनाए रखने में पुलिस की भूमिका सबसे अहम रही।

सूत्रों के अनुसार, कुछ ग्रामीणों द्वारा बार-बार रास्ता रोकने, नारेबाजी करने और कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस बल ने संयम के साथ भीड़ को नियंत्रित कर स्थिति को सामान्य बनाए रखा।

ग्रामीणों के खिलाफ दो मामले दर्ज

पत्रकार की कार को नुकसान पहुंचाने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था फैलाने के मामले में पुलिस ने दो प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि आंदोलन की आड़ में यदि किसी ने दोबारा पत्रकार, आम नागरिक या प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की, तो कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों को आगे करने पर भी सख्ती

प्रदर्शन के दौरान बुजुर्ग महिलाओं और छोटे बच्चों को एसडीएम कार्यालय के बाहर बैठाकर दबाव बनाने की कोशिश भी देखने को मिली। पुलिस ने इस संवेदनशील स्थिति को बेहद सूझबूझ से संभाला और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस प्रकार की गतिविधियों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।

पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी बनी चर्चा का विषय

शहर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा तिल्दा पुलिस की सक्रियता, धैर्य और मजबूत कानून व्यवस्था को लेकर है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो आंदोलन की आड़ में कुछ ग्रामीण बड़ी तोड़फोड़ और अव्यवस्था फैला सकते थे।

फिलहाल पुलिस-प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन उपद्रव, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तिल्दा पुलिस की इसी मुस्तैदी से पूरे क्षेत्र में हालात नियंत्रण में बने हुए हैं।

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