
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत निराकृत बताने पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने पहले की जांच रिपोर्ट पर भी जताई थी आपत्ति
तिल्दा-नेवरा। रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड अंतर्गत ग्राम मढ़ी स्थित मेसर्स गौरी गणेश इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को लेकर वायु प्रदूषण और औद्योगिक संचालन से जुड़ी शिकायत के मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय ने निरीक्षण के बाद कार्रवाई की है। मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, उद्योग के निरीक्षण में प्रदूषण संबंधी अनियमितताएं सामने आने के बाद वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31क के तहत नोटिस जारी किया गया है। वहीं, शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन में अपनी शिकायत को निराकृत बताए जाने पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
15 अक्टूबर को किया गया उद्योग का निरीक्षण
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 1076 पर 11 अक्टूबर 2026 को शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायत क्रमांक WP261000229856 के संबंध में मंडल के वैज्ञानिक एवं उप अभियंता ने 15 अक्टूबर 2026 को उद्योग का निरीक्षण किया।
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग का संचालन पाया गया। उद्योग द्वारा जल की आपूर्ति भू-जल के माध्यम से किए जाने की जानकारी दी गई। इसके लिए केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण से अनापत्ति प्राप्त होने का उल्लेख किया गया है, जिसकी वैधता 4 जून 2027 तक बताई गई है।
डस्ट उत्सर्जन और हाउसकीपिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
क्षेत्रीय कार्यालय के पत्र में बताया गया है कि उद्योग के स्पंज आयरन विभाग के प्रोडक्ट सेपरेशन बिल्डिंग से अधिक मात्रा में प्रदूषित धूल यानी डस्ट का उत्सर्जन पाया गया। इसके अलावा, उद्योग की फेरो एलॉय इकाई से संबंधित बैग फिल्टर पूर्ण क्षमता से कार्यरत नहीं होने के कारण अत्यधिक मात्रा में प्रदूषित धूल का उत्सर्जन होने का उल्लेख किया गया है।
निरीक्षण के दौरान हाउसकीपिंग व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। इन कमियों के आधार पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने संबंधित उद्योग को वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों के तहत नोटिस जारी किया।
मंडल के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित प्रकरण को निराकृत मानते हुए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल से शिकायत को विलोपित किए जाने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए सवालों और उद्योग में प्रदूषण की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

शिकायतकर्ता ने पहले की जांच रिपोर्ट पर भी उठाए थे सवाल
सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायत में शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार शर्मा ने आरोप लगाया था कि उनकी पूर्व शिकायत क्रमांक WP260900197949 की जांच रिपोर्ट को संलग्न कर मामले को निराकृत कर दिया गया, जबकि उनके अनुसार वायु प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है।
शिकायत में निरीक्षण से पहले और बाद की जीपीएस टैग तस्वीरों का हवाला देते हुए जांच रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के कारण आसपास के लोगों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रदूषण की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कदम उठाने की मांग की थी।
शिकायत निराकृत, लेकिन कार्रवाई की स्थिति पर नजर
सीएम हेल्पलाइन के उपलब्ध विवरण के अनुसार, शिकायत पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई दर्ज की गई है। 16 अक्टूबर 2026 को शिकायत को उच्च स्तर पर भेजे जाने और निराकरण संबंधी प्रक्रिया का उल्लेख है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि अथवा असंतुष्टि की स्थिति को लेकर भी पोर्टल पर प्रविष्टियां दर्ज हैं।
ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि निरीक्षण में दर्ज प्रदूषण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए उद्योग प्रबंधन द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं और पर्यावरण संरक्षण मंडल आगे अनुपालन की जांच किस प्रकार करता है।
अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर: निरीक्षण में डस्ट उत्सर्जन, बैग फिल्टर की कार्यक्षमता और हाउसकीपिंग से जुड़ी कमियां दर्ज होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उद्योग प्रबंधन नोटिस के अनुपालन में आवश्यक सुधार करता है या नहीं। साथ ही, शिकायतकर्ता की आपत्तियों और क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति पर विभागीय निगरानी कितनी प्रभावी रहती है, यह भी अहम रहेगा।
