
6 से 8 हाईवा वाहनों से मुरुम परिवहन की चर्चा, मौके पर जेसीबी वाहन क्रमांक CG04 M 2642 होने की जानकारी; खनिज विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत रजिया में कथित अवैध मुरुम उत्खनन का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, गांव में बड़े पैमाने पर मुरुम उत्खनन और परिवहन किए जाने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि मौके पर 6 से 8 हाईवा वाहनों के जरिए मुरुम का परिवहन किया जा रहा है। वहीं, उत्खनन स्थल पर जेसीबी वाहन क्रमांक CG04 M 2642 के मौजूद होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधि किसकी अनुमति से संचालित हो रही है और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है?
जनप्रतिनिधियों के संरक्षण की चर्चा, आखिर कौन है पर्दे के पीछे?
रजिया में कथित मुरुम उत्खनन को लेकर स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि इस पूरे मामले को किसी प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का संरक्षण प्राप्त हो सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जनप्रतिनिधि का नाम और उनकी कथित भूमिका की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी हो गया है कि इस गतिविधि के पीछे वास्तव में कौन है और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो उसे किसका सहारा मिल रहा है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मुरुम का उत्खनन और परिवहन लगातार किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल रही है? क्या खनिज विभाग को इसकी सूचना है? क्या मौके पर जाकर जांच की गई है? यदि जांच नहीं हुई है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
6 से 8 हाईवा वाहनों से परिवहन की चर्चा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रजिया में 6 से 8 हाईवा वाहनों के माध्यम से मुरुम परिवहन किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, मौके पर जेसीबी वाहन क्रमांक CG04 M 2642 के होने की जानकारी भी मिली है। यदि यह जानकारी सही है, तो संबंधित विभागों के लिए मामले की जांच करना आवश्यक है।
जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मुरुम उत्खनन के लिए वैध अनुमति ली गई है या नहीं, वाहनों के पास परिवहन संबंधी आवश्यक दस्तावेज हैं या नहीं और निकाली जा रही मुरुम की मात्रा निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं। इन बिंदुओं की जांच से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
हर बार उठते हैं सवाल, लेकिन कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में मुरुम उत्खनन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संबंधित गतिविधियां किन परिस्थितियों में संचालित हो रही हैं। यदि बिना अनुमति के उत्खनन किया जा रहा है, तो यह सरकारी राजस्व और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा गंभीर मामला है।
अब सवाल यह है कि क्या खनिज विभाग केवल शिकायत मिलने का इंतजार कर रहा है, या मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच भी करेगा? क्या विभाग को संबंधित स्थल, वाहनों और उत्खनन की जानकारी है? यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कब कार्रवाई की जाएगी?
खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
रजिया में कथित अवैध मुरुम उत्खनन को लेकर खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यदि बड़े वाहनों के जरिए लगातार मुरुम का परिवहन हो रहा है, तो विभाग को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए। उत्खनन स्थल का निरीक्षण, अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच और परिवहन में लगे वाहनों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव या संरक्षण के कारण कार्रवाई प्रभावित तो नहीं हो रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्राम रजिया में सामने आ रही जानकारी को गंभीरता से लेते हुए खनिज विभाग और जिला प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि उत्खनन वैध है या अवैध, परिवहन में किन वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रजिया में मुरुम उत्खनन के पीछे कौन-सा जनप्रतिनिधि है, यदि किसी का संरक्षण है तो वह कौन है, और संबंधित विभाग इस मामले में कार्रवाई कब करेगा? प्रशासन की जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
