
राजपत्र में अधिसूचना जारी, महिला निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पति-पुत्र समेत करीबी रिश्तेदार नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि या समन्वयक
तिल्दा-नेवरा। नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजनों के प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में काम करने की व्यवस्था पर अब सरकार ने स्पष्ट रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 6 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना का प्रकाशन 7 अगस्त 2026 के असाधारण राजपत्र में किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ नगरपालिकाओं में लोकसभा सदस्य या विधानसभा सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नामांकन के लिए अर्हताएं नियम, 2022 में संशोधन किया गया है। संशोधित प्रावधान में विशेष रूप से निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों को प्रतिनिधि बनाए जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
पति, पुत्र, पुत्री सहित करीबी रिश्तेदारों पर प्रतिबंध
नए जोड़े गए नियम 4-ए में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार को उनके प्रत्यक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक व्यक्ति (Liaison Person) के रूप में नामांकित या नियुक्त नहीं किया जाएगा।
इसका सीधा असर तिल्दा-नेवरा नगर पालिका जैसे नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ेगा। अब निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति या अन्य करीबी रिश्तेदार द्वारा प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने को लेकर नियम स्पष्ट हो गया है।
‘प्रॉक्सी राजनीति’ पर लगाम लगाने की कोशिश
राज्य सरकार के इस संशोधन को नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से स्थानीय निकायों में यह चर्चा होती रही है कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर कई मामलों में उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
नई व्यवस्था के बाद तिल्दा-नेवरा नगर पालिका में भी यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह कोई पारिवारिक सदस्य प्रतिनिधि या समन्वयक की भूमिका तो नहीं निभा रहा है।
राजपत्र में प्रकाशित हुआ नियम
अधिसूचना क्रमांक RULE-801/101/2026-UAD के तहत यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है। राजपत्र में इसका हिंदी और अंग्रेजी दोनों में प्रकाशन किया गया है।
अब देखने वाली बात होगी कि तिल्दा-नेवरा नगर पालिका में इस नए प्रावधान का पालन किस तरह कराया जाता है और निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर सक्रिय रहने वाले पारिवारिक प्रतिनिधियों की भूमिका पर इसका क्या असर पड़ता है।

