
कोई किसी का पद गिराने में जुटा, कोई ठेकेदारी रुकवाने में; कोई अतिक्रमण तुड़वाने में लगा, तो कोई भ्रष्टाचार के मामलों को बना रहा हथियार
तिल्दा-नेवरा की राजनीति इन दिनों दिलचस्प दौर से गुजर रही है। यहां राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं विकास, योजनाओं या घोषणाओं से ज्यादा इस बात को लेकर सुनाई दे रही हैं कि आखिर अगला निशाना कौन होगा और किसकी फाइल कब खुलेगी।
किसी की पूरी ताकत किसी का पद गिराने में लगी हुई है, तो कोई किसी की ठेकेदारी बंद करवाने के लिए हर संभव रास्ता तलाश रहा है। कहीं अतिक्रमण की शिकायतों का दौर चल रहा है तो कहीं पुराने मामलों को नए सिरे से उठाकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिशें जारी हैं।
नगर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इन दिनों कई लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर जनहित के मुद्दों के लिए कम और विरोधियों के खिलाफ जानकारी जुटाने के लिए ज्यादा लगा रहे हैं। कोई राजस्व रिकॉर्ड खंगाल रहा है, कोई ठेकों की जानकारी जुटा रहा है, तो कोई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों की परतें खोलने में जुटा हुआ है।
तिल्दा-नेवरा की सियासत का हाल कुछ ऐसा हो गया है कि यहां हर राजनीतिक खेमा दूसरे खेमे की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए है। कौन किसके खिलाफ शिकायत करेगा, किसकी जांच की मांग होगी और किसके खिलाफ अगला मोर्चा खुलेगा, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार लगातार गर्म है।
राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि नगर की राजनीति अब आरोप, प्रत्यारोप और जवाबी रणनीतियों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। एक पक्ष कोई कदम उठाता है तो दूसरा पक्ष उसके जवाब में नई तैयारी के साथ मैदान में उतर जाता है।
शहर में व्यंग्य के तौर पर यह भी कहा जाने लगा है कि तिल्दा-नेवरा में इन दिनों राजनीति कम और “राजनीतिक जांच एजेंसियों” का दौर ज्यादा चल रहा है। यहां कोई किसी का अतिक्रमण खोज रहा है, कोई किसी की ठेकेदारी पर सवाल उठा रहा है, कोई किसी का पद हिलाने में लगा है तो कोई भ्रष्टाचार के आरोपों को नया राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटा हुआ है।
फिलहाल तिल्दा-नेवरा की राजनीति में सियासी तापमान लगातार बढ़ता नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक शतरंज किस करवट बैठेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
