बिलारी में मुरुम उत्खनन जारी, मुरुम माफियाओं को किसका संरक्षण? जोटा स्थित प्लांट में डंपिंग की चर्चा

बिलारी में मुरुम उत्खनन जारी, मुरुम माफियाओं को किसका संरक्षण? जोटा स्थित प्लांट में डंपिंग की चर्चा

समाचार प्रकाशित होने के बाद भी नहीं थम रहा उत्खनन, खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल; संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत बिलारी में कथित अवैध मुरुम उत्खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक दिन पूर्व समाचार प्रकाशित किए जाने के बावजूद क्षेत्र में मुरुम उत्खनन जारी रहने की सूचना सामने आ रही है। वहीं, सूत्रों के अनुसार, बिलारी से निकाली जा रही मुरुम को जोटा स्थित प्लांट में डंप किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मुरुम उत्खनन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है और कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?

मुरुम माफियाओं को संरक्षण किसका?

क्षेत्र में लगातार मुरुम उत्खनन की शिकायतों के बीच अब मुरुम माफियाओं को कथित संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर संरक्षण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि, किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि बिना ठोस साक्ष्य के नहीं की जा सकती।

जोटा स्थित प्लांट में डंपिंग की सूचना

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जोटा स्थित प्लांट में मुरुम डंप की जा रही है। यदि यह जानकारी सही है, तो खनिज विभाग को मुरुम के स्रोत, परिवहन दस्तावेजों, उत्खनन की अनुमति और भंडारण की वैधता की जांच करनी चाहिए। क्षेत्र से लाखों रुपये मूल्य की मुरुम निकाले जाने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसकी वास्तविक मात्रा और संभावित राजस्व नुकसान का आकलन विभागीय जांच से ही स्पष्ट होगा।

खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल

समाचार प्रकाशित होने के बाद भी यदि उत्खनन जारी है, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी है? क्या मौके का निरीक्षण किया गया है? यदि उत्खनन नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई कब होगी?

अब जरूरत है निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की। मुरुम माफियाओं को किसी भी स्तर पर संरक्षण मिलने के आरोपों की जांच होनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। खनिज संपदा की सुरक्षा और शासन के राजस्व को होने वाले संभावित नुकसान को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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