
तिल्दा-नेवरा (रायपुर ग्रामीण), 17 अप्रैल 2026।
क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बजरंग पावर एवं स्पात कंपनी, टड़वा (तिल्दा) में हुए एक दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत के बाद मामला गरमा गया, जिसमें छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के हस्तक्षेप से मृतक परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता दिलाई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम भूरसूदा निवासी सुनील नायक, जो पिछले तीन वर्षों से कंपनी में कार्यरत था, 14 अप्रैल की सुबह रोज की तरह ड्यूटी पर गया था। इसी दौरान कंपनी परिसर में अचानक हुए हादसे में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद उसे तत्काल एंबुलेंस से एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन द्वारा परिजनों को सूचना तो दी गई, लेकिन घटना की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। साथ ही प्रारंभिक तौर पर जो मुआवजा प्रस्तावित किया गया, उसे परिजनों ने अपर्याप्त बताते हुए असंतोष जताया।
इस बीच परिजनों ने छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना से संपर्क किया। संगठन के पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद तहसीलदार, थाना प्रभारी, कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच लंबी चर्चा हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की मौजूदगी में समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
बैठक के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कंपनी प्रबंधन ने मृतक परिवार को 28 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, मृतक की पत्नी को 70 प्रतिशत वेतन के बराबर पेंशन तथा परिवार के एक सदस्य को कंपनी में नौकरी देने पर लिखित सहमति दी।
इस निर्णय के बाद मृतक के परिजनों ने राहत की सांस ली और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि संगठन के सहयोग से ही उन्हें न्याय मिल सका है।
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर किया है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कंपनियों को और गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
निष्कर्ष:
यह मामला न केवल एक परिवार के लिए न्याय का प्रतीक बना, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को भी उजागर कर गया। अब देखना होगा कि प्रशासन और कंपनियां इस घटना से सबक लेकर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कितनी ठोस पहल करती हैं।
